क्या ऐसे कम-सुख़न

क्या ऐसे कम-सुख़न[१] से कोई गुफ़्तगू[२] करे
जो मुस्तक़िल[३] सुकूत[४] से दिल को लहू करे

अब तो हमें भी तर्क-ए-मरासिम[५] का दुख नहीं
पर दिल ये चाहता है के आगाज़[६] तू करे

तेरे बग़ैर भी तो ग़नीमत[७] है ज़िन्दगी
खुद को गँवा के कौन तेरी जुस्तजू करे

अब तो ये आरज़ू है कि वो जख़्म[८] खाइये
ता-ज़िन्दगी[९] ये दिल न कोई आरज़ू करे

तुझ को भुला के दिल है वो शर्मिंदा-ए-नज़र[१०]
अब कोई हादिसा[११] ही तेरे रु-ब-रू [१२]करे

चुपचाप अपनी आग में जलते रहो "अभिषेक"
दुनिया तो अर्ज़े--हाल[१३] से बे-आबरू[१४] करे
!


  1. ↑ कम बोलने वाला
  2. ↑ बातचीत
  3. ↑ अटल
  4. ↑ मौन
  5. ↑ मेल-जोल छोड़ना
  6. ↑ प्रारम्भ
  7. ↑ उत्तम
  8. ↑ घाव
  9. ↑ जीवन भर
  10. ↑ लज्जित दृष्टि
  11. ↑ दुर्घटना
  12. ↑ समक्ष
  13. ↑ हालत सुनाने
  14. ↑ अपमानित

contributed by, ABHISHEK

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